सितम्बर 4, 2011


मुहब्बतों के दायरों को यूँ कम ना कीजिये ,
जितना हो सके खुशबू को फैलने दीजीये

इसी की बदौलत है खुशियों की रोसनाई ,
शाम को सुबह की मुहब्बत में ढलने दीजिये

कर रहे भवरे शिद्दत से कलियों से आरज़ू ,
सब्र करो जनाब मुहब्बत से खिलने तो दीजिये

ये सारे मशायल दुनिया के हल हो जायेंगे ,
बस दिलों को दिलों से मिलने तो दीजिये

कमलेशसमझ जाएँ वो हालदिल अपना ,
बस मुहब्बत भरे लबों को हिलने तो दीजिये

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देखा दिल कहता था, सूरज पर भी आग जलेगी !!

अगस्त 29, 2011

 
देखा दिल कहता था, सूरज पर भी आग जलेगी !!
जो दबी पड़ी थी बरसों से, वो हिम भी पिघलेगी ,।

बन गयी ज्वाला युवा-शक्ति ,अन्ना की चिगारी से ,
बिछ गये फूल अन्ना की खातिर, देश की हर क्यारी से ,.

देश -प्रेम के जज्बे को, हर दिल में इतना उभार दिया ,
हर क़ुरबानी की खातिर सबने, अपने को तय्यार किया ,.

भूखे रह कर इक सन्यासी का, चमत्कार अनोखा था ,
वो भी असमंजस में फंसे रहे, जिनके मन में धोखा था ,.

अभी आन्दोलन नही खत्म हुआ बस अनशन ही छोड़ा है ,
बस जन-मानस के हिर्द्यों को जड़ से बहुत जिन्झोड़ा है ,.

‘कमलेश’अभी तो देश की कुछ ही हुई मांगे पूरी हैं ॥,
”अन्ना’ के भारत की मूर्ती रहती अभी बहुत अधूरी है ..,,..

chhodo anna ji is desh ko …..!!!

अगस्त 25, 2011

छोडो !अन्ना जी, इस देश को इसके हाल पर ,
हिन्दू-मुस्लिम का टीका, लगा दिया भाल पर ,


‘भूखे रहने ‘ में भी लगाते हैं ,मजहब का चश्मा ,
सरे आम तमाचा है, इक जुटता के गाल पर ।


ये भ्रष्टाचार का नासूर ,कोई आज से नही ,
वो [बुखारी] खुद क्यूँ नही ,उलझे इस सवाल पर ।


संकुचित सोच खतरनाक है, भ्रष्टाचार से बड़ी ,
खुदा दे उनको अक्ल ! उनके उस ख्याल पर ।


अब दुनिया को दिखता है बस अन्ना का आइना ,
शायद गयी नही नजर इनकी ,भावनाओं के उबाल पर ,


अब उठो निकलो मजहबों की दीवारों से बाहर ,
‘कमलेश’ना रखो भ्रष्टाचार को ,धर्म की दीवार पर ॥

SABKI NAZAR ME HAI…!!!

अगस्त 10, 2011

अब सबकी नजर में है कारवां की रह -गुजर ,
तबसे हुई है उनकी[सत्ता]हम पे तिरछी नजर ,

मंजिल तक पहुंचना गर हुआ नसीब में ,
नही रोक सकता कोई इन्हें तूफाने-कहर ,

ये होश में आ जाएँ तो होगा बहुत अच्छा ,
घुलता जाता है फिजां में बे-चैनी का जहर ,

ये क्यों नही समझते सारी दुनिया का दर्द ,
कहीं टूट ना जाये उनकी ही दुनिया का सबर ,

जिदों से टूटते वक्त ने देखे हैं कितने ताजो-तख्त ,
खुदा !क्या ?होने वाला है इनका भी वही हसर ,

‘कमलेश ‘जो लबरेज़ हो सारी दुनिया के प्यार से [समर्थन ],
क्या बदलेगा शक्लो-सूरत उनकी ,सत्ता का ज़हर ॥

बन जाएगी सिंह -गर्जना कौतूहल जो था वीरानो में…..

अगस्त 6, 2011


कौन कहता है ! नही गूंजेगी आवाज उन बहरे कानो में ,
बन जाएगी सिंहगर्जना कौतूहल जो था वीरानो में ,

चर्चा जो है छिड़ी हुई अब गलीगली और कूचों में ,
मन्दिरमस्जिद के साथसाथ साँची के स्तूपों में ,

नही थमेगा ना थमने देंगे ,जनमानस की इच्छा को ,
और कठिन बना देंगे उनके[सत्ता]लिये जनपरीक्षा को ,

अब ना फिर चार जून की परिभाषा दोहराई जाएगी ,
क्योंकि अब ना दिन खत्म होगा ,रात्रि कहाँ से आएगी ?

भ्रष्टाचार के खिलाफ ये जननिर्णायक रण होगा ,
ये सत्ता की हठधर्मी , और अहंकार के कारण होगा ,

आओ बढो आगे होकर गर कल को आज बचाना है ,
नही तो बैठो आँखें मूँद लो गर कायर कहलाना है ,

कमलेशनहीअन्नाके बच्चों के भविष्य को खतरा है ,
वह तुम सबकी खातिरआमरणअनशनकरने उतरा है..
जय हिंद