Archive for the ‘सीधी बात’ Category

देखा दिल कहता था, सूरज पर भी आग जलेगी !!

अगस्त 29, 2011

 
देखा दिल कहता था, सूरज पर भी आग जलेगी !!
जो दबी पड़ी थी बरसों से, वो हिम भी पिघलेगी ,।

बन गयी ज्वाला युवा-शक्ति ,अन्ना की चिगारी से ,
बिछ गये फूल अन्ना की खातिर, देश की हर क्यारी से ,.

देश -प्रेम के जज्बे को, हर दिल में इतना उभार दिया ,
हर क़ुरबानी की खातिर सबने, अपने को तय्यार किया ,.

भूखे रह कर इक सन्यासी का, चमत्कार अनोखा था ,
वो भी असमंजस में फंसे रहे, जिनके मन में धोखा था ,.

अभी आन्दोलन नही खत्म हुआ बस अनशन ही छोड़ा है ,
बस जन-मानस के हिर्द्यों को जड़ से बहुत जिन्झोड़ा है ,.

‘कमलेश’अभी तो देश की कुछ ही हुई मांगे पूरी हैं ॥,
”अन्ना’ के भारत की मूर्ती रहती अभी बहुत अधूरी है ..,,..

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AGAR TUM MERE JAZBATTON SE….!!!

जुलाई 6, 2010


मेरी जिन्दगी में इतने झमेले ना होते
गर तुम मेरे जज्बातों से खेले ना होते ,

बहुत पर खुशनुमा थी मेरी यह जिन्दगी
गर दिखाए हसीं- ख्वाबों के मेले न होते ,

रफ्ता-रफ्ता चल रहा था कारवां जिन्दगी का
दुनिया की इस महफिल में हम अकेले न होते ,

”कमलेश” ना लुटता दिले- सकूं मेरा कभी
गर मेरी नजरों के सामने ,तेरे हाथ पीले ना होते ,

हमेशा ही कहर बरपा है इश्क पर जमाने का
राहें फूलों की होती कांटे भी न नुकीले होते

कैसे हसीं पल देखो…!!

जून 8, 2010


कैसे हसीं पल देखो ,मिले मेरी जिन्दगी को
उसकी वरगाह में ,हाथ जुड़े बन्दगी को ।


यह वह मुकाम है जो कुछ को नसीब है
बरसों गुजर गये ,उसकी रजा -मन्दगी को ।


बरकत वहीं पर बरसे ,जहाँ मिल के दो दिल हरसे
अब भी पाक -साफ कर लो ,दिल की गंदगी को।


कुदरत का इक करिश्मा है ,जो मिले हैं हम सब
फुर्सत कहाँ यहाँ जो ,रोज मिले हम जिंदगी को ।


करते हैं ”कमलेश”
सब इक दूजे की वाह-वाह !
नही दी जगह दिल में ,किसी ने ना -पसंदगी को .!!

इक -इक कतरे का हिसाब चाहिए !

मई 18, 2010

अपने लहू के इक -इक कतरे का हिसाब चाहिए !
फंदे पर लटकते ‘AFZAL ‘और ‘कसाब’चाहिए!

जिनका बहा है खून जरा ,उनके दिल से पूछिए ,
जो देखा था आँखों ने वो , सुंदर सा ख्वाब चाहिए !

कितनी गैरत बाकि है इस देश में ,गैरों के लिये ,
क्यों ? ये मेहमान नवाजी इनकी .जवाब चाहिए !

जिंदगियोंमें जो अँधेरा किया, इन जालिमों ने ,
इनमे रोशनी भरने को, हजारों महताब चाहिए !

इनकी जड़ों को काट दो ,जहाँ से ये निकलती है ,
उन शहीदों की आत्माओं को, भी इंसाफ चाहिए !

दिल रोता है देख कर अपने, देश के कानूनों को ,
आतंकियों के लिये कानून बिलकुल सख्त और साफ चाहिए !

‘कमलेश ‘क्या हो गया है इस देश के कर्णधारों को ,
हमे वोटों और लाशों की गिनती का इनसे हिसाब चाहिए !!

भरोसा हम करे किसपर

अक्टूबर 10, 2009

रोसा हम करे किसपर भरोसा टूट जाता है,


ज़रासी बात पर हमसे ज़माना रूठ जाता है।

किसी भी अजनबी को हम फरिश्ता ही समझते हैं,


वो आता है ठहरता है हमीं को लूट जाता है।

कसम खाता है वो निसदिन हमेशा साथ देने की,


उसी के बाद उसका साथ हमसे छूट जाता है


दुआएँ भी निकलती है कभी खाली नहीं जातीं,


जिसे मिलती नहीं उसका मुकद्दर फूट जाता है

फ़रेबों की ज़मीनों पर यहाँ पौधे पनपते हैं,


वहाँ दामन बचाने में पसीना छूट जाता है

हमारा दिल धड़कता है कभी थकता नहीं ,


कमलेशकी बात से लेकिन ज़रासा टूट जाता
है॥