Archive for the ‘साहस’ Category

देखा दिल कहता था, सूरज पर भी आग जलेगी !!

अगस्त 29, 2011

 
देखा दिल कहता था, सूरज पर भी आग जलेगी !!
जो दबी पड़ी थी बरसों से, वो हिम भी पिघलेगी ,।

बन गयी ज्वाला युवा-शक्ति ,अन्ना की चिगारी से ,
बिछ गये फूल अन्ना की खातिर, देश की हर क्यारी से ,.

देश -प्रेम के जज्बे को, हर दिल में इतना उभार दिया ,
हर क़ुरबानी की खातिर सबने, अपने को तय्यार किया ,.

भूखे रह कर इक सन्यासी का, चमत्कार अनोखा था ,
वो भी असमंजस में फंसे रहे, जिनके मन में धोखा था ,.

अभी आन्दोलन नही खत्म हुआ बस अनशन ही छोड़ा है ,
बस जन-मानस के हिर्द्यों को जड़ से बहुत जिन्झोड़ा है ,.

‘कमलेश’अभी तो देश की कुछ ही हुई मांगे पूरी हैं ॥,
”अन्ना’ के भारत की मूर्ती रहती अभी बहुत अधूरी है ..,,..

कर लो सपने पूरे

सितम्बर 10, 2009

“छोड़ो आलस , जोड़ो साहस, कर लो सपने पूरे ;

करलो हठ, हो प्रकट कोई, रहना जाएँ अधूरे ;


तुम मोड़ दो, अपनी किस्मत की , नाव को;

त्याग दो जिन्दगी से, मनहूसियत के भाव को ;


करो अच्छे कर्म, इस जीवन में;

यही तुम्हारी थाती है ;


कर्म अनुरूप करेंगे याद तुम्हें ;

दुनिया तो आती जाती है;


सपने तो सपने होतें हैं , कहती दुनिया सारी
;
पर असली दुनिया से , लगे सपनों की दुनिया प्यारी ;


सपनो में भी, दुःख कलेश पड़ जातें हैं ;

पर जब भी खुली आँख ,एकदम उड़ जाते हैं ;

taj

दिल फूटे जब , सपना टूटे ;

बिखरे दर्द चहूँ रे ;

ये जगबीती की बात नही , ” कमलेश ” बेदर्द कहूं रे ।।

असहाय पाता क्यूं हूँ ?

अगस्त 19, 2009

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असहाय ,असहज ,पाता क्यूं हूँ ? इस व्यवस्था के चक्रव्यहू में ,, प्रयत्नशील हूँ ,इस से नीकल जावूँ ,पर वीफल हो । कीनारे पाता हूँ , मन में बस हैं द्वन्द्ध ,क्यों कर ,न कर पाया ,वीरोध कुतर्कों का । अभिमन्यु का कत्ल ? करेंगे पांडव क्या ? सत्ता और व्यवस्था में ,है सर्वत्र कौरव ही। काल स्वरूप पांडव ,परीवर्तन से नही बचे। कुतर्क बोधहो ,गया है आज के अर्जुन को । । ।<