Archive for the ‘सलाह’ Category

बाटों खुशियाँ इस जीवन में,..!!!

अप्रैल 18, 2010

  • बाटों खुशियाँ इस जीवन में,
  • कल को किसने देखा है;

  • यही सत्य है इस जीवन का,
  • बाकी तो सब धोखा है ;

  • सत्कर्मों का उद्यम कर लो,
  • दुष्कर्मों से दूर रहो;

  • मृत्यु के तुम भय को त्यागो,
  • जीवन से भरपूर रहो;

  • कर्मों से किस्मत को मोड़ो,
  • उस पर ही विश्वास करो;

  • दीन-हीन की सेवा में ही ,
  • तीरथ गंगा घाट करो;

  • स्वर्ग नर्क की परिभाषा को,
  • निजकर्मों से बदलो तुम ;

  • कर्म हमारा भाग्य बनात
  • जैसा मर्जी लिख लो तुम

kamlesh verma

कहने को सब ..!!!

नवम्बर 3, 2009

कहने को सब यहाँ,अपने खास खास ,
रिश्ते हैं ये मतलब के बाकी सब बकवास

मतलब हो तोतुमभीआपहोजाता है ,
नही तो रिश्ता रिसतेरिसते रिस जाता है

मतलब होतो खून का कोई नही है भेद ,
नही तो अपना खून भी हो जाय सफ़ेद

मतलब हो तो दिख जाए हो चाहे जितनी दूर ,
पलकों के नीचे दिखे ,लाख कोशिस करो हजूर

कमलेशमतलब से करो ,प्यार प्रेम परिहास ,
मतलबखोलो फालतू ,जहाँ हो अति विस्वास

कर लो सपने पूरे

सितम्बर 10, 2009

“छोड़ो आलस , जोड़ो साहस, कर लो सपने पूरे ;

करलो हठ, हो प्रकट कोई, रहना जाएँ अधूरे ;


तुम मोड़ दो, अपनी किस्मत की , नाव को;

त्याग दो जिन्दगी से, मनहूसियत के भाव को ;


करो अच्छे कर्म, इस जीवन में;

यही तुम्हारी थाती है ;


कर्म अनुरूप करेंगे याद तुम्हें ;

दुनिया तो आती जाती है;


सपने तो सपने होतें हैं , कहती दुनिया सारी
;
पर असली दुनिया से , लगे सपनों की दुनिया प्यारी ;


सपनो में भी, दुःख कलेश पड़ जातें हैं ;

पर जब भी खुली आँख ,एकदम उड़ जाते हैं ;

taj

दिल फूटे जब , सपना टूटे ;

बिखरे दर्द चहूँ रे ;

ये जगबीती की बात नही , ” कमलेश ” बेदर्द कहूं रे ।।

नेत्र दान और अंधविश्वास

अगस्त 23, 2009

अगर आँखें दे दी तो ,अगले जन्म में होगा बापू अंधा ,

यह हैं सब बेकार की बातें ,है पाखंडियों का धंधा ।

इस जन्म में हो ? अँधा या टूटी किसी की लात ,

तो क्या पहले होती थी ? पैर -आंख दान की बात ।

तो फ़िर क्यों ? पैदा होते बच्चे ,लंगडे -लूले ,

अंध विश्वास के मकड़ जाल में ,

निज कर्तव्यों को भूले ।

करो नेत्र दान मरनोप्रान्त ,

”कमलेश ”आपकी इच्छा है ।

मर कर भी जी सकते हो ,

यही हमारी शिक्षा है ॥

क्यों लगता है आपकी आँखों में चश्मा ???

अगस्त 16, 2009

आपने अपने सार्वजनिक जीवन में अक्सर लोगों को जिसके चश्मा लगा हो ,जब मिलेगा तो एक ही बात पूछेगा कितना नम्बर है ?” “मेरे परिवार में तो किसी के नही था पता नही इतने छोटे बच्चे को कैसे लग गया ,खाने पीने का भी पूरा ध्यान रखते हैं??यह ज्यादा टीवी देखने करके या पढ़ाई करके हो गया होगा ! तो मै आपको बताता हूँ, आपके मन में जो भी कारण आ रहे हैं’, वो भी इस समस्या के मूल में हो सकतेहैं , पर मुख्य कारण यह नही हैइसका मुख्य कारण अपनी आँख की ट्रांसपरेंट भाग’ जिसे ” ;;- ,”कोर्निया ”के नाम से जानते है ,यह ही आपकी आँख के दृष्ट दोष के लिए जिम्मेदार है ,होता क्या है ? जब इस ”कोर्निया” का आकार एवम इसकी सतह सामन्य आकार कीअपेक्षा अगर नुकीली हो , तो आपको ‘ ‘माइनस ”यानि ‘अवतल’ लेंस लगता है ,जब यही सर्फेस सामान्य से समतलहो तो आपको ”पलस ”का मतलब ‘उत्तल लेंस ‘लगता है ॥ इसमे इक कारण अनुवंसिकता का भी है ‘ अगर आपके माता -पिता ‘दादा दादी ‘नाना- नानी ‘को यह दृष्ट दोष था, तो आपके या आपके बच्चे को हो सकता है !!और आज की भी फास्ट जीवन सैली का इसमे पूरा योगदान है’, इस दोष में ,खाने में हरी सब्जियों की जगह नूडल ,पिज्जा .बर्गर खाते है, आज के बच्चे इस करके भी अब कम उम्र में आँखों की बिमारियों का प्रतिसत बढ़ गया है .इस लिए इस समस्या का निदान काफी समय के लिए तो चश्मा ही है ,बस आप अपने चश्मे की अच्छी तरह देखभाल करो, यह आप की करेगा ,और अगर आप का नम्बर ज्यादा है तो ,आप घबराएँ नही ,जब आपकी या आपके बच्चे की उम्र बीस वर्ष हो जाए और आपके लगे हुए चश्मे का नम्बर करीब एक साल तक एक जैसा यानि ”constant” रहे तो आप के लिए हाज़िर है ;; ‘ . लेसिक लेजर ”अपने चश्मे से मुक्ति का सबसे अच्छा साधन है । विशेष करके लड़कियों के लिए साथ ही एक नेक सलाह और! अगर आप अपने बेटा-बेटी की शादी करने जा रहे हो तो ,मेरी सलाह है की लड़का-लड़की और कुंडली देखने के साथ इस बात की तस्सली जरूर कर ले, की दोनों का एक जैसा चश्मे का नम्बर न हो !मतलब मेरा ‘ माइनस’ नम्बर से है, नही तो .आने वाली जेनरेशन ” ,, माइनस-माइनस=” पलस-” हो जायेगी ,,यानि” high myopic ”सो इस बात ध्यान रखे और सुखी रहे ,और चश्मे को मुसीबत न समझे ,. .. जय भारत