Archive for the ‘भारतीय राजनीति’ Category

vishwas ki in daliyon ko…..!!

जुलाई 31, 2011

विश्वास की इन टूटती डालियों को ,
कोई तो उठ के सहारा दे दो ,

छोडो ना इनको भाग्य के भरोसे ,
बस साथ होने का इशारा दे दो ,

पहुँच कर रहेंगे ये अपनी मंजिल तलक ,
पूरी राह नही ,बस चलने को किनारा दे दो ,

ये भर कर रहेंगे दिलों में उजालों की बिजलियाँ ,
बस इनको विश्वास का इक शरारा दे दो ,

जुल्म की सत्ता हटाने की हमको नही जरूरत ,
बस शान से जीने का हक हमारा दे दो ,

तन मन धन से हम हैं इनके साथ सब ,
बस ‘कमलेश , इस अहसास का हुलारा दे दो ॥

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26/11 ke shaheedon ko naman…

नवम्बर 27, 2010
कमलेश भगवती प्रसाद वर्मा

आज फिर याद जहन में २६/११ का मंजर आया ,
करने छलनी सीना सरहद पार से खंजर आया ।

बीती थी इक सुहानी रात नव प्रभात फूटा था ,
मुंबई की उस सुबह को वहसी- दरिंदों ने लूटा था ।

बे-गुनाह निहत्थे लोगों पर पिशाचो ने वार किया ,
हेमंत,सलास्कर ,आप्टे जैसे सपूतों को मार दिया ।

लहू उबल जाता है ,दिल भी भर आता है ?….
इतने बड़े देश में कोई कैसे ये कर जाता है ।

कितने दिनों तक प्रेम निमन्त्रण इनको बांटे जायेंगे ,
कब तक ?ये हत्यारे हिंदुस्तान की बिरयानी खायेंगे ॥?

सदा न्याय मिले सबको, कोई कब क्या कहता है ,
इस दरिन्दे[कसाब} की खातिर क्या कोई सबूत रहता है ।

वक्त आ गया है इन दुष्टों की जड़ को खत्म करो ॥!
बन भश्मासुर इनके शिविरों को बमों से भस्म करो ।

तब तक ये कुत्ते की ”पाक -पूंछ ”नही कभी सीधी होगी ,
जब तक नही ”ब्रह्मोस ”की जद में पूरी पाक परिधि होगी ।

”कमलेश ” नमन उन शहीदों को जो देश पर कुर्बान गए ,
अब भी जागो देश वासियों यह करते वो आह्वान गए ………!!

kaise bhula de..bhopal-kand ko..??!!

जून 16, 2010


हम कैसे भुला दें जहन से, भोपाल कांड को ,
जिसने हिला के रख दिया ,पूरे ब्रह्माण्ड को ॥

भोपाल मे इंसानी लाशों के, अम्बार लगे थे ,
बुझ गए जीवन दिए जो, अभी-अभी जगे थे ॥

कोई किसी का ,कोई किसी का ,रिश्ता मर गया ,
जिंदगी समेटने की कोशिश मे ,सब कुछ बिखर गया ॥

जिनकी आँखों की गयी रौशनी , जीने की भूख गयी ,
खिली हुई कुछ उजड़ी कोखें , कुछ कोखें पहले सूख गयी ॥

सालों बाद स्मृत पटल पर, यादें धुंधली नही हुई हैं ,
भयावह मंजर से अब भी ” उसकी आँखें खुली हुई हैं”॥

इन्हें न्याय की दहलीज से,बस तिरस्कार मिला ,
कैसे -कैसे मिली हमदर्दी ,कैसा ”राज-सत्कार मिला ॥

कौन सहलाये इन मजलूमों की ,तन मन की चोटों को ,
गिनने मे रहीं व्यस्त -सरकारे ,लाशों और वोटों को ॥

सब दलों के नेता देख रहे हैं ,इसे राजनीति के दर्शन मे ,
जब की कोई फर्क नही है ”अफजल ”कसाब ‘और ANDERSON मे ॥

अगर ”कमलेश ” नही न्याय -सुरक्षा पूरा सरकार करेगी ,
क्या फिर कहीं दूसरे, भोपाल -कांड का इंतजार करेगी ॥

इक -इक कतरे का हिसाब चाहिए !

मई 18, 2010

अपने लहू के इक -इक कतरे का हिसाब चाहिए !
फंदे पर लटकते ‘AFZAL ‘और ‘कसाब’चाहिए!

जिनका बहा है खून जरा ,उनके दिल से पूछिए ,
जो देखा था आँखों ने वो , सुंदर सा ख्वाब चाहिए !

कितनी गैरत बाकि है इस देश में ,गैरों के लिये ,
क्यों ? ये मेहमान नवाजी इनकी .जवाब चाहिए !

जिंदगियोंमें जो अँधेरा किया, इन जालिमों ने ,
इनमे रोशनी भरने को, हजारों महताब चाहिए !

इनकी जड़ों को काट दो ,जहाँ से ये निकलती है ,
उन शहीदों की आत्माओं को, भी इंसाफ चाहिए !

दिल रोता है देख कर अपने, देश के कानूनों को ,
आतंकियों के लिये कानून बिलकुल सख्त और साफ चाहिए !

‘कमलेश ‘क्या हो गया है इस देश के कर्णधारों को ,
हमे वोटों और लाशों की गिनती का इनसे हिसाब चाहिए !!

पंजाब के लोगों को सरकार का गणतन्त्र -दिवस पर उपहार ..!!!

फ़रवरी 1, 2010
  • जब की इस स्वाधीन भारत में इस दिन अर्थात २६ जनवरी को हमेशा लोक कल्याण के लिए
  • नए -नए कार्यक्रम जो भी लागू करने होते थे
  • तो राज्य या केंद्र की सरकारें ऐसे अवसरों का ही चयन करके उस दिन उन योजनाओं की उदघोषणा करते थे  ,
  • लेकिन यहाँ श्रीमान ”बादल साहब ” की सरकार देखो एक ऐसे काम के लिए इस दिन का चुनाव किया .
  • जिसके बारे में शायद ,उनको भी गुमान न रा हो, की उनके कुछ सिफ सलार जिस दिन  जनता के लिए लाभकारी योजनाओं के धिधोरे पीटने होते हैं,
  • उस दिन उनकी सरकार ,एक राष्ट्रिय पर्व के दिन प्रदेश की जनता को बसों का किराया बढ़ाने का तोहफा देकर  मना रही है ,
  • ऐसा यही सरकार क्र सकती है ,है न निराली।
  • देश का सबसे अमीर प्रदेश होने का मान हासिल कर चुके ,इस प्रदेश  की हालत बहुत अच्छी नही है ,
  • जैसी कहावत है ”बड़े होना एक बात है ,पर बड़े बने रहना बहुत बड़ी बात होती है ”
  • जो अब इस प्रदेश को मुश्किल हो रहा है ,सिर्फ सरकार की मुफ्त खोरी की जो आदत डाली गयी है वही इनके गले की फाँस बन गयी है ,
  • अब तो भगवान ही इस प्रदेश को भी चलाएगा॥