Archive for the ‘याद’ Category

kyun ! khelte hain dil se..?

फ़रवरी 28, 2011


क्यूँ ?खेलते हैं दिल से ,इस जहाँ के लोग ,
ये इतने हैं बेदर्द !ये हैं कहाँ के लोग !!?

रखते नही लिहाज़ जरा भी, मुहब्बत के का ,
रुतबा दिखाते हैं हमेशा, अपने झूठे गरूर का

गर नही चला जाता था मंजिलजानिब ,
तो क्यों ?मेरी तरफ हाथ बढ़ाना जरूर था

बस अपना हो मकसद हासिल,ये तेरी सोच थी ,
इसमें मंजिल का नही ! सोचका ही कसूर था

कमलेशदेखेगी दुनिया प्यार के, नाम को इस तरह ,
कहेगी !! ये तो प्यार नहीं दिमागेफितूर था

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गर तुम मेरे जज्बातों से…!!!

जून 26, 2010

मेरी जिन्दगी में इतने झमेले ना होते
गर तुम मेरे जज्बातों से खेले ना होते ,
..

बहुत पर खुशनुमा थी मेरी यह जिन्दगी
गर दिखाए हसीं- ख्वाबों के मेले न होते ,

रफ्ता-रफ्ता चल रहा था कारवां जिन्दगी का
दुनिया की इस महफिल में हम अकेले न होते ,

”कमलेश” ना लुटता दिले- सकूं मेरा कभी
गर मेरी नजरों के सामने ,तेरे हाथ पीले ना होते ,

हमेशा ही कहर बरपा है इश्क पर जमाने का
राहें फूलों की होती कांटे भी न नुकीले होते ॥

यूँ ही तुमने भुलाया कैसे ?

फ़रवरी 23, 2010

उल्फत नही थी दिल में ,तो दिल को रुलाया कैसे ?
मंजिल तलक कसमों को, यूँ ही तुमने भुलाया कैसे ?

गर पता होता दिल को, तेरी इस बात का,
क्या दर्द भरा सिला दिया ,मेरे जज्बात का ।

पहले ही मोड़ लेते अपने ,अरमानों की नाव को ,
गर न दिलाया होता यकीं , प्यार कि बरसात का ।

मझधार में छोड़ दी पतवार ,प्यार के इमकान की ,
फना हो के चुका दी हमने, कीमत तेरे अहसान की ।

हमेशा मेरी रूह दुआ करे ,तेरे आबाद रहने की ,
पर न दे खुदा तुझे मौका ,किसी को अपना कहने की ।

‘कमलेश ‘तुम्ही ने इस जिन्दगी को, इक दम से मोड़ा था ,
शिकवा है तोडा उसी दिल को, जिससे तुमने ही जोड़ा था ॥

मुझको न मिलो …!!!

नवम्बर 3, 2009


मुझको न मिलो तुम ,
कोई गम नही॥

तुम्हारे पास होने का अहसास ,
मिलने से कम नही ,,

तुम कहीं भी हो हवाएं ,
बता जाती हैं हाल तेरा ,,

तुम्हे मिलने की आरजू में ,
कट गया साल मेरा ,,

बिछूड़ने का दर्दे गम,
बयाँ क्या करें ?

निकलता ही नही,

दिल से ख्याल तेरा ,

‘नही मिले थे तो अच्छे थे’

कैसे कह दूँ ?दुरुस्त है ”मलाल” तेरा ,,

”कमलेश’‘सोच कर देखो ,

उन बद नसीबों का ,

जिनसे कोई पूछता ही नही ,

”क्या है हाल तेरा ”