Archive for the ‘अहसास’ Category

zindgi ka har mod ….!!

जून 20, 2011

हर मोड़ जिंदगी का लगे  , है इक सीधा रास्ता ,
जिसके हर मोड़ से लगे ,है  सीधा वास्ता  ,

उन लम्हों को सजा रखा है, दिल के फूलदानों में ,
हसरतों ने महफूज़ किया ,जिन्हें   वक्त के तूफानों में ,

नजर भर कर देखें  तो कहते ,क्या हुआ प्यार है ,
ना देखा जब उस नजर से ,तो हुआ  जीना दुश्वार है ,

इस कदर हो बंदिशें जमाने की, जिन्दगी जीने पर ,
तो जमाना  क्यों हलकान होता है, हमारे पीने पर ,

मिले सबको किसी की चाहत ,ये नही कोई जरूरी है ,
दुनिया में कितनो की अब तक, हसरत रही अधूरी है ,

‘कमलेश’ कभी वक्त की कश्ती रुकी नही  किनारे पर ,
किनारा खुद आ मिले कश्ती को, वक्त के इशारे पर ॥

man ki pyas…!!

सितम्बर 19, 2010

;मन की बुझी ना प्यास तेरे दीदार की
मन का था भ्रम या हद थी प्यार की ।

क्यूँ नहीं समझता ये दिल अपनी हदों कों
किया सब जो थी मेरी कूवत अख्तियार की।

जिद में क्यूँ कर बैठा तू ऐसी खता
कर दी बदनामी खुद ही अपने प्यार की ।

सुर्खरू हो जाता है तन-मन तुझे देख कर
सुध-बुध नही रही इसे अब संसार की ।

हर तमन्ना में बस तमन्ना है तेरे दीद की
कयामत की हद बना रखी है इंतजार की ।

जमाना चाहे जितने कांटे बिछा दे राहों में
कमलेश 'जीत आखिर होगी मेरे प्यार की ॥

SACHCHI HAI MUHABBAT KA….!!!

जुलाई 6, 2010


कितना दिल लगाने से पहले, इत्मिनान किया मैंने ,
सच्ची है मुहब्बत ‘का’ फिर भी इम्तहान दिया मैंने ॥

कहने को तो मुहब्बत करना, गुनाह है इस जहाँ में ,
फिर भी करके मुहब्बत ,किया सबको हैरान मैंने ॥

हमारे इश्क की चर्चा है, शहर के ह़र मोड़ पर ,
इस तरह सारे शहर को, किया परेशान मैंने ॥

न छूटे दिल की लगी ,तेरी दिल-लगी में कहीं ,
कितना तेरे लिये दिल ,लगाना किया आशां मैंने ॥

तुझसे माँगा न कभी, तेरी चाहत के सिवा ,
तेरी चाहत की राहों में , सब किया कुर्बान मैंने ॥

न कभी तेरे जज्बात फिसले ना, फिसला दिल तेरा ,
इसी जज्बे का ”कमलेश ” अहसान खुद लिया मैंने ॥

AGAR TUM MERE JAZBATTON SE….!!!

जुलाई 6, 2010


मेरी जिन्दगी में इतने झमेले ना होते
गर तुम मेरे जज्बातों से खेले ना होते ,

बहुत पर खुशनुमा थी मेरी यह जिन्दगी
गर दिखाए हसीं- ख्वाबों के मेले न होते ,

रफ्ता-रफ्ता चल रहा था कारवां जिन्दगी का
दुनिया की इस महफिल में हम अकेले न होते ,

”कमलेश” ना लुटता दिले- सकूं मेरा कभी
गर मेरी नजरों के सामने ,तेरे हाथ पीले ना होते ,

हमेशा ही कहर बरपा है इश्क पर जमाने का
राहें फूलों की होती कांटे भी न नुकीले होते

गर तुम मेरे जज्बातों से…!!!

जून 26, 2010

मेरी जिन्दगी में इतने झमेले ना होते
गर तुम मेरे जज्बातों से खेले ना होते ,
..

बहुत पर खुशनुमा थी मेरी यह जिन्दगी
गर दिखाए हसीं- ख्वाबों के मेले न होते ,

रफ्ता-रफ्ता चल रहा था कारवां जिन्दगी का
दुनिया की इस महफिल में हम अकेले न होते ,

”कमलेश” ना लुटता दिले- सकूं मेरा कभी
गर मेरी नजरों के सामने ,तेरे हाथ पीले ना होते ,

हमेशा ही कहर बरपा है इश्क पर जमाने का
राहें फूलों की होती कांटे भी न नुकीले होते ॥