Archive for the ‘अपनी मार्तु भाषा’ Category

bahut din hue…!!!

दिसम्बर 26, 2011

बहुत दिन हुए उनको देखे हुए ,
गली में  निकलते कंकर फेंके हुए ,


मुंह  ऊपर उठा जरा  मुस्करा देना ,
देख लेती  उनको बिना देखे हुए ,


हर खट-खट में उनकी पद -चाप  सुनती ,
वो ही है !जान लेती ,बिना देखे हुए ,


ना जाने कहाँ गुम हुए ! वो बेदर्द मौसम ,
महसूस ही कर लेती उनको  बिना देखे हुए ,


‘कमलेश’ ऐसी चाहत की कुछ तो बात होगी !
ता उम्र काट दी बिना उनको देखे हुए ॥

DESH KE AAYEEN KO ….!!!

अक्टूबर 23, 2011

क्या ? देश के आइन -ए- इबारत को, बिलकुल साफ किया जाये ,
गद्दार ,कातिलों कसाब, अफजल ,नलिनी को माफ़ किया जाये ,

यह कहने वाले जरा झांक कर देखें, अपने दिलों में एक बार ,
जिनको इन्होंने मारा है उनके, साथ भी इंसाफ किया जाये ,

राजनीती की रोटियां सेंकने को, यहाँ तंदूर बहुत हैं मौजूद ,
बस लकड़ियों की जगह ना , आवाम की लाश लिया जाये ,

मजाक बना दिया है इस देश के, कानून को देखो लोगों ,
कुछ भी मुमकिन है इस देश में, इसका अहसास किया जाये ,

क्यूँ जान देते हैं सीमा पर हमारे जवान देश की खातिर ,
जो होता है होने दो ”बस बैठ के चलो आराम किया जाये ,

बस एक ‘प्रस्ताव ,पास होने से ,मेहनत हो जाएगी मिटटी ,
ऐसी पार्टी -नेताओ को नंगा देश में, सरे आम किया जाये ,

‘कमलेश ‘ये देश है या तमाशा ?चंद सियासतदानों का ,
वक्त आने पर इनकी असलियत नंगा -ए-हमाम किया जाये ॥

kaisi yh syah raat …!!!

सितम्बर 24, 2011

कैसी है ! ये स्याह रात , कैसी ये तन्हाई है ,
फिर क्यूँ ऐसे हालत में, तेरी याद आयी है ,

ना कोई सबब बनता है ,दिल  तुझे याद करे ,
मगर जिगर में क्यूँ कर, हूक सी उठ आयी है ,

पुराने जख्म ना कुरेदे कोई, यादों के  खंजर से ,
बड़ी मुश्किल से इससे ,दिल ने निजात पाई है ,

कैसे जी लेते  है वो ! बे-वफाई के दागों  के साथ ,
कभी नही हुई देखो जमाने में, इनकी  रुसवाई है ,

जलाल-ए-इश्क को ज़नाब , कमतर ना आंकिये ,
‘कमलेश’ इश्क के  जलवों  में ये  कायनात नहाई है ॥

wah !ham kitni zaldi……!!!

सितम्बर 12, 2011

वाह ! कितनी जल्दी हम , सब कुछ भी भूल जाते हैं ,
हम सब अपने -अपने काम पर, बच्चे स्कूल जाते हैं ।

क्या ? कोई फर्क नही पड़ता, हमको इन घटनाओं से ,
जिनकी कोख हुई सूनी पूछो, उन दुखियारी माओं से ।

इतनी कम कीमत कैसे है?,यहाँ हम सबके जीने की
कब आएगी कोई शिव- शक्ति ” ये हलाहल पीने की ।

हम हैं विश्व महा-शक्ति कहते मुहं नही थकते हैं ,
पर हर छोटी बात की खातिर [अमरीका ]का मुहं तकते हैं ।

अब वक्त कभी का आया है ,हर भारतवासी के हिस्से में ,
अब ना खुद को उलझाओ ,जात-पांत धर्म के किस्से में ।

मिल कर मारो इमान से हमला,अपने देश के गद्दारों पर ,
कमलेश ‘मरेगा हर आतंकवादी ”लिखा पढ़े दीवारों पर ”॥

कब छटेंगे भय के बादल, कब होगी दूर उदासी !!

सितम्बर 8, 2011

कब छटेंगे भय के बादल, कब होगी दूर उदासी ,
कब हम सब कह पाएंगे ‘हम हैं भारतवासी’ ।

सब मिल बैठें ,मिल कर, कुछ तो ऐसा सोचो ,
भेद-भाव की मैल को , अपने दिलों से पोंछों ,

क्या करोगे इन हालातों में जब, भारत माता की छाती पिघलती है ,
दिल फट जाता है इस माँ का भी, जब लालों की चिताएं जलती हैं,

कब तक दुश्मन खेलेगा हमारी ‘भारत मां ” की अश्मत से ,
कब तक बाधें रखोगे अपने को ,राजनीति की किस्मत से ,

तोड़ो बंधन छोडो क्रन्दन ,बन ज्वाला मुखी फूट पड़ो ,
सर्वनाश की बन ज्वाला ,दुश्मन पर तुम टूट पड़ो ,

रोज-रोज किश्तों में मरना नही ,कुछ तो अब करना होगा ,
हमको अब जीना होगा, उनको अवश्य अब मरना होगा ,

‘कमलेश ‘नही हट सकती है, सबके ज़िम्मेदारी कंधों से ,
भगवान बचा ले अब भी देश को, राजनीति के फंदों से ॥