kaisi yh syah raat …!!!

कैसी है ! ये स्याह रात , कैसी ये तन्हाई है ,
फिर क्यूँ ऐसे हालत में, तेरी याद आयी है ,

ना कोई सबब बनता है ,दिल  तुझे याद करे ,
मगर जिगर में क्यूँ कर, हूक सी उठ आयी है ,

पुराने जख्म ना कुरेदे कोई, यादों के  खंजर से ,
बड़ी मुश्किल से इससे ,दिल ने निजात पाई है ,

कैसे जी लेते  है वो ! बे-वफाई के दागों  के साथ ,
कभी नही हुई देखो जमाने में, इनकी  रुसवाई है ,

जलाल-ए-इश्क को ज़नाब , कमतर ना आंकिये ,
‘कमलेश’ इश्क के  जलवों  में ये  कायनात नहाई है ॥

Advertisements

1 Comment »


RSS Feed for this entry

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: