विश्वास की इन टूटती डालियों को , कोई तो उठ के सहारा दे दो , छोडो ना इनको भाग्य के भरोसे , बस साथ होने का इशारा दे दो , पहुँच कर रहेंगे ये अपनी मंजिल तलक , पूरी राह नही ,बस चलने को किनारा दे दो , ये भर कर रहेंगे दिलों में उजालों [...]
Archive for the ‘दिल की . .’ Category
vishwas ki in daliyon ko…..!!
जुलाई 31, 2011zindgi ka har mod ….!!
जून 20, 2011हर मोड़ जिंदगी का लगे , है इक सीधा रास्ता , जिसके हर मोड़ से लगे ,है सीधा वास्ता , उन लम्हों को सजा रखा है, दिल के फूलदानों में , हसरतों ने महफूज़ किया ,जिन्हें वक्त के तूफानों में , नजर भर कर देखें तो कहते ,क्या हुआ प्यार है , ना देखा [...]
kyun ! khelte hain dil se..?
फ़रवरी 28, 2011क्यूँ ?खेलते हैं दिल से ,इस जहाँ के लोग , ये इतने हैं बेदर्द !ये हैं कहाँ के लोग !!? रखते नही लिहाज़ जरा भी, मुहब्बत के सऊर का , रुतबा दिखाते हैं हमेशा, अपने झूठे गरूर का । गर नही चला जाता था मंजिल-ए-जानिब , तो क्यों ?मेरी तरफ हाथ बढ़ाना जरूर था । [...]
jab bhi hua ishara…!!
नवम्बर 3, 2010जब भी हुआ इशारा, उस परवर -दिगार का , बरसीं रहमतें आसमां से ,झरना बहा प्यार का ॥ उसकी रज़ा से दिए आँधियों में जलते हैं … हो ना रजा तो मजाल आ जाये झोंका ‘बयार का ” ॥ ये चमकती शबनम चहकती बुलबुल ,है उसी का नज़ारा … उसके इशारे से पत्थरों में , [...]
man ki pyas…!!
सितम्बर 19, 2010;मन की बुझी ना प्यास तेरे दीदार की मन का था भ्रम या हद थी प्यार की । क्यूँ नहीं समझता ये दिल अपनी हदों कों किया सब जो थी मेरी कूवत अख्तियार की। जिद में क्यूँ कर बैठा तू ऐसी खता कर दी बदनामी खुद ही अपने प्यार की । सुर्खरू हो जाता है [...]
